कुदरहा CHC में प्रशासनिक ‘सर्जरी’: प्रभारी हटाए गए, अब व्यवस्था सुधरने की बारी।
क्या कुर्सी बदलने से खत्म होगा कुदरहा में दवाओं का काला कारोबार? वायरल वीडियो और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब जनता की नजरें नए प्रभारी पर। क्या अस्पताल में मिलेगी मुफ्त दवा या जारी रहेगा बाहर की पर्ची का खेल?
कुदरहा CHC में ‘बदलाव’ की आहट: क्या महज कुर्सी बदली है या व्यवस्था भी सुधरेगी?
- कुदरहा CHC: तबादले से क्या थमेगा दवाओं का अवैध कारोबार और दलाली का खेल?
- वायरल वीडियो का असर: स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई, डॉ. फैज वारिस को मिली कुदरहा की कमान।
- कुदरहा में ‘दवा माफिया’ पर कार्रवाई कब? प्रभारी बदलने से उम्मीदों पर टिकी हैं निगाहें।
बस्ती: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कुदरहा (बनहरा) की चर्चा पिछले कुछ दिनों से जन-स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के केंद्र के रूप में हो रही थी। आखिरकार, स्वास्थ्य विभाग ने प्रशासनिक चाबुक चलाते हुए प्रभारी डॉ. अश्वनी यादव को हटाकर परशुरामपुर CHC स्थानांतरित कर दिया है। उनकी जगह डॉ. फैज वारिस को कुदरहा CHC की नई कमान सौंपी गई है।

सवाल जो अब भी मुंह बाए खड़े हैं:
प्रभारी का तबादला एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन यह केवल एक रस्म अदायगी है या सुधार की शुरुआत? कुदरहा CHC के गलियारों में लंबे समय से अवैध मेडिकल स्टोरों की दलाली और मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं लिखने का जो खेल चल रहा था, वह किसी से छिपा नहीं है। वायरल वीडियो ने उन तमाम दावों की पोल खोल दी थी, जिनमें मुफ्त इलाज और सरकारी दवाओं की उपलब्धता का ढिंढोरा पीटा जाता है।
क्या होगा ‘दवा-माफिया’ का?
सवाल यह नहीं है कि प्रभारी कौन है, सवाल यह है कि क्या नया प्रशासन उस तंत्र को तोड़ पाएगा, जो गरीब मरीजों की जेब पर डाका डालकर अपनी तिजोरियां भर रहा है? क्या कुदरहा की ओपीडी अब सच में सरकारी दवाओं से गुलजार होगी, या फिर बाहर के मेडिकल स्टोरों की पर्ची का खेल बदस्तूर जारी रहेगा?
प्रशासन की साख का इम्तिहान:
स्वास्थ्य विभाग ने खबर का संज्ञान लेकर तबादला तो कर दिया, लेकिन अब असली अग्निपरीक्षा डॉ. फैज वारिस और विभागीय उच्च अधिकारियों की है। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या उन अवैध मेडिकल स्टोरों पर भी कोई ठोस कार्रवाई होगी, जो अस्पताल की दहलीज के भीतर से मरीजों को लूट रहे हैं? या फिर यह तबादला केवल जनता के आक्रोश को शांत करने का एक अस्थायी ‘मरहम’ बनकर रह जाएगा?
भ्रष्टाचार की जड़ें अगर गहरी हैं, तो केवल पेड़ (प्रभारी) बदलने से काम नहीं चलेगा, जड़ों पर प्रहार करना होगा। कुदरहा की जनता अब उम्मीद नहीं, परिणाम देखना चाहती है।
– अजीत मिश्रा (खोजी)
मंडल ब्यूरो प्रमुख, वंदे भारत लाईव टीवी न्यूज



















